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हनुमान मंदिर, जामसांवली, सौंसर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश (Jamsawali Hanuman Mandir, Jamsawali, Sausar, Chhindwara, Madhya Pradesh)

मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा जिले के सर्वाधिक सुप्रसिद्ध 3 सिद्ध स्थलों में से एक चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली है।

चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली में छिंदवाड़ा ही नहीं वरन आसपास के जिलों से एवं अन्य प्रदेशों से, विशेषकर महाराष्ट्र से श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन एवं पूजन करने आते हैं। जो कि हनुमान जी का जागृत सिद्ध धाम है। 

हनुमान जी के नाम के पहले चमत्कारिक विशेषण लगने से ही स्वयं सिद्ध है कि यहां चमत्कार ही चमत्कार है। 

चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली जी की श्री मूर्ति के सामने प्रेत बाधा पीड़ित व्यक्ति तो आते ही स्वयं झूमने लगता है।

चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली कैसे पहुंचे :-

सड़क मार्ग  :

चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली सौंसर से 8 किलोमीटर दूर स्थित है।

चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली पांढुर्णा से 35 किलोमीटर दूर स्थित है।
 
जिला छिंदवाड़ा से 62 किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली स्थित है।

जिला सिवनी से 130 किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली स्थित है।

जिला नरसिंहपुर से 188 किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली स्थित है।

जिला बैतूल से 120 किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली स्थित है।

जिला नागपुर से 68 किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली स्थित है।

जिला भंडारा से 127 किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली स्थित है।

जिला वर्धा से 149 किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली स्थित है।

जिला अमरावती से 156 किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली स्थित है।

जिला यवतमाल से 206 किलोमीटर की दूरी पर चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली स्थित है।

छिंदवाड़ा - नागपुर सड़क मार्ग पर 54 किलोमीटर पर सौंसर तथा सौंसर से पांढुर्णा सड़क मार्ग पर 8 किलोमीटर पर, चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली का यह प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।

रेल मार्ग  :

छिंदवाड़ा - नागपुर रेल मार्ग द्वारा सौंसर रेलवे स्टेशन पर उतरकर बस या टैक्सी द्वारा चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली तक पहुंचा जा सकता है।

यहां छिंदवाड़ा, सिवनी, बैतूल, होशंगाबाद आदि मध्यप्रदेश के तथा नागपुर, वर्धा, भंडारा, यवतमाल, अमरावती आदि महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों के श्रद्धालु दर्शनार्थी प्रतिदिन आते हैं।

प्रायः मंगलवार एवं शनिवार के दिन वर्षभर दर्शनार्थियों की भीड़ बनी रहती है। क्योंकि यह दिवस श्री हनुमान जी की आराधना एवं पूजन के विशेष दिन माने जाते हैं।

मंगलवार एवं शनिवार के अतिरिक्त भी सप्ताह के अन्य दिनों में भी श्रद्धालुओं का आना निरंतर बना रहता है, विशेषकर छुट्टी के दिन रविवार व अवकाश के दिवसों में काफी अधिक मात्रा में श्रद्धालु आते हैं।

हनुमान जयंती में तो चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली में विशेष व्यवस्था बनानी पड़ती है। उक्त दिवस सैकड़ों की संख्या में चोपहिया तथा हजारों की संख्या में दुपहिया वाहनों से श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं। 

इसके अलावा पैदल यात्रा व गदा समर्पण वाले पदयात्री भी बड़ी संख्या में श्रद्धा भाव से चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली आते हैं। 

श्री हनुमान जयंती के दिन तो लगभग एक लाख श्रद्धालुओं से भी अधिक श्रद्धालु दर्शन हेतु चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली आ जाते हैं।

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चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली जी के इस जागृत सिद्ध धाम में श्रद्धालु अपनी-अपनी भावना के अनुसार मनोकामनाएं मांगते हैं। जो चमत्कारिक हनुमान जी की कृपा से पूर्ण भी होती है।

श्रद्धालु अपने श्रद्धा भाव से चमत्कारिक हनुमान जी को सिंदूर, चोला, तेल, नारियल, प्रसाद, मिठाई आदि, कई प्रकार के भोग चढ़ाते हैं। जल चढ़ाते हैं। मन्नत मांगते हैं। प्रसाद रूप में जलामृत एवं चोला का सिंदूर ले जाना नहीं भूलते हैं।

जैसा कि पूर्व में वर्णन किया गया है कि प्रेत बाधा पीड़ित व्यक्ति यहां चमत्कारिक हनुमान जी की श्री मूर्ति के समक्ष आते ही झूमने लगता है। प्रेत बाधा पीड़ित व्यक्ति के साथ उनके परिवार के लोग भी आते हैं। 

परिवार वालों के रुकने एवं ठहरने की व्यवस्था "चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर जाम सांवली ट्रस्ट" द्वारा आवास गृह बनाकर की गई है। प्रेत बाधा पीड़ित व्यक्ति यहां धीरे-धीरे प्रेत बाधा से मुक्त होकर ठीक हो जाता है।

पीपल वृक्ष के नीचे लेटी हुई चमत्कारिक हनुमान जी की मूर्ति के संबंध में गांव के बुजुर्गों द्वारा बताए अनुसार पहले यह मूर्ति सीधी खड़ी हुई अवस्था में थी। 

राजस्व अभिलेख में लगभग 100 वर्ष पूर्व पीपल वृक्ष के नीचे चमत्कारिक हनुमान जी मंदिर का उल्लेख मिलता है। लगभग 9 डिसमिल भूमि राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय रूप से दर्ज भी की गई है। जिस जगह श्री चमत्कारिक हनुमान जी की मूर्ति स्थित है। यहां लगभग 200 वर्ष पूर्व से पीपल का एक विशाल वृक्ष था। 

पीपल पेड़ के चारों और आसपास घास एवं कटीली झाड़ियां थी। खेत मालिक के द्वारा उन झाड़ियों को साफ करवाया गया। यह घटना लगभग सन् 1885 के आसपास की होना संभावित है। 

पीपल वृक्ष के चारों ओर सफाई के पश्चात मजदूरों को श्री चमत्कारिक हनुमान जी की मूर्ति दिखाई दी। मजदूरों ने यह बात खेत मालिक को बताई। यह चर्चा सांवली गांव में हवा की तरह फैल गई। 

उस वक्त ग्राम के पुलिस पटेल और ग्राम के कुछ लोगों द्वारा उस स्थान को साफ कर, स्थान पर टीन का एक आयताकार टीन सेड बनवाया गया। जमीन करीब 9 डिसमिल शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज की गई। कहा जाता है कि पहले यह मूर्ति खड़ी थी। मूर्ति के पास में कहीं बड़ा खजाना है। इस दृष्टि से एक दिन 20-25 डाकू घोड़े पर बैठकर खजाना लूटने आए थे। यह देख चमत्कारिक हनुमान जी खजाने पर लेट गए। डाकुओं ने 20 घोड़े लगाकर हनुमान जी की मूर्ति को हटाने की पुरजोर कोशिश भी की। परंतु हनुमान जी की मूर्ति टस से मस नहीं हुई। अंततः निराश होकर डाकू वापस चले गए।

श्री चमत्कारिक हनुमान जी की मूर्ति लेटी हुई अवस्था में है। कुछ वर्षों बाद गांव में ही 5 लोगों की एक कमेटी (समिति) सन् 1965 के लगभग बनाई गई। समिति मंदिर व पूजा-पाठ का काम देखती थी। कुछ वर्ष पश्चात 11 लोगों की दूसरी कमेटी (समिति) बनी। उस समिति का संविधान एवं बायलॉज (नियम) बनाकर समिति का पंजीयन करवाया गया। 

समिति के बायलॉज (नियम) के अनुसार ट्रस्ट कमेटी में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव तथा कोषाध्यक्ष एवं मंदिर व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालन हेतु अलग-अलग समितियां, जैसे निर्माण समिति, मंदिर व्यवस्था समिति, पाकशाला समिति, क्रय समिति, धार्मिक समारोह समिति आदि बनाई गई। इन समितियों में प्रभारी तथा सदस्य होते हैं। 

चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली संस्थान की एक बजरंग गौशाला भी है। उसमें लगभग 500 गौमाता है। उस गौशाला समिति का भी अध्यक्ष व सचिव है।

चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली में दो बार श्री हनुमानजी की आरती होती है। पहली आरती प्रातः 5:30 बजे एवं दूसरी आरती शाम 5:30 बजे बजे होती है।

चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली, ट्रस्ट कमेटी द्वारा भक्तों के लिए  आवास गृह भी बनाए गए हैं। जहां कुछ राशि चुका कर भक्त, परिवार सहित रुक भी सकते हैं।
                  
मध्यप्रदेश शासन द्वारा चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली के भव्य मंदिर निर्माण हेतु स्वीकृत राशि से मंदिर का निर्माण कार्य वर्तमान में जारी है।
              
चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली का यह मंदिर जाम और सांवली गांव के बीच स्थित है। एवं श्री मूर्ति के चमत्कार भी हैं। अतः "चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली " के नाम से यह धाम सुप्रसिद्ध है। यहां वर्ष भर लगभग पांच लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं। यह छिंदवाड़ा जिले का अति प्रसिद्ध सिद्ध धाम है।

घोघरा जलप्रपात, अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग एवं विट्ठल रुक्मणी मंदिर :-

आप भी परिवार सहित आएंं। चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली के दर्शन करने के साथ-साथ निकट ही 5 किलोमीटर दूर घोघरा जलप्रपात के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हुए पिकनिक मना सकते हैं। वापसी में 13 किलोमीटर दूर मोहगांव हवेली में अर्धनारीश्वर ज्योतिर्लिंग एवं लगभग 300 वर्ष प्राचीन विट्ठल रुक्मणी मंदिर के दर्शन करते हुए अपने परिवार सहित धार्मिक यात्रा का आनंद उठा सकते हैं। भगवान विट्ठल की अद्भुत मूर्ति की यह विशेषता है कि उनका दाहिना हाथ कमर पर न होकर हथेली कुछ प्रदान करते हुए है।

धोतकी के हनुमान जी :-
    
छिंदवाड़ा - नागपुर सड़क मार्ग पर, जामसांवली तिगड्डे से लगभग 2 कि.मी. दाहिनी ओर एक रास्ता ग्राम धोतकी को जाता है। जो सड़क से लगभग 1.5 कि.मी. अंदर है। यहां भी श्री हनुमानजी की विशाल श्री मूर्ति दर्शनीय एवं सिद्ध है।

चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर, जामसांवली, सौंसर, छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश जाने के लिये मेप :-


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