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देवगढ़ की बावड़ियां, जिला छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश {भाग-1} | Bavadi | Stepwells of Devgarh, Chhindwara, Madhya Pradesh

देवगढ़ की बावड़ियां, जिला छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश {भाग-1} | Stepwells of Devgarh, Chhindwara, Madhya Pradesh

जिला छिंदवाड़ा में स्थित देवगढ़ किला के निर्माता तथा देवगढ़ राज्य के संस्थापक राजा जाटवा शाह का प्रादुर्भाव सन् 1570 ई. से 1620 ई. के समय हुआ। जाटवा शाह के जन्म एवं राज्य प्राप्त करने की कहानी अत्यंत रहस्यपूर्ण है।

सन् 1907 ईस्वी के जिला छिंदवाड़ा के गजेटियर जिसका संकलन आईसीएस ऑफिसर श्री आर.वी रसेल ने किया था। इसमें इसका हवाला है कि जाटवा शाह, जो कि गोंंड राजवंश का निर्माता था, एवं असाधारण शक्ति का स्वामी था। 

युवावस्था में कार्य की खोज में वह रणशूर घनशूर सरदारों के पास हथियागढ़ किले में नौकरी करने पहुंचा। अपनी असाधारण वीरता से उसने सैनिकों में अपना अलग स्थान बनाया। उसकी क्षमता से भयभीत होकर, किसी बहाने उसे समाप्त करने की दृष्टि से, दिवाली के दूसरे दिन होने वाले देवी की परंपरागत पूजा में, देवी को बलि देने हेतु लकड़ी की तलवार से भैंसा का वध करने का आदेश दिया। 

ऐसी विसंगत स्थिति में जाटवा शाह ने भैंसा का तो वध किया ही, साथ ही दोनों गौली भाइयों रनशूर घनशूर का भी वध करते हुए गोंड राज वंश की नींव डाली।

प्रसिद्ध इतिहासकार अबुल फजल ने "आईन-ए- अकबरी" में उल्लेख किया है कि जाटवा शाह के पास अपनी सुव्यवस्थित सेना थी। उसके पास 2000 घुड़सवार, 50,000 पैदल सेना एवं 200 हाथियों से सुसज्जित सेना थी। 

राजा जाटवा शाह एक कुशल और दूरदर्शी शासक था। उसने 50 वर्ष के अपने शासनकाल में राज्य का पर्याप्त विस्तार किया, जिसमें नागपुर, छिंदवाड़ा, बैतूल, होशंगाबाद, भंडारा आदि क्षेत्र भी शामिल थे। 

जाटवा शाह ने देवगढ़ के किले का निर्माण तो कराया ही, साथ ही पाटन सावंगी, नगरधन, पांढुर्णा, सौसर व विदर्भ के अन्य मुख्यालयों को भी बसाया। इतने बड़े विशाल राज्य की  सेना और उसकी जनता की जल आपूर्ति हेतु देवगढ़ के सघन वन क्षेत्रों में बावड़ियों का निर्माण कराया गया।


देवगढ़ में जनश्रुतियों में एक कहावत प्रचलित है कि देवगढ़ में "800 कुएं एवं 900 बावली" थी।

दूसरी कहावत प्रचलित है कि "देवगढ़ खसला नागपुर बसला" अर्थात देवगढ़ खिसल गया और नागपुर बस गया। 

यहां हम बात कर रहे हैं देवगढ़ की 800 कुएं एवं 900 बावली की। राजा जाटवा शाह ने अपने शासनकाल में अपनी प्रजा एवं सेना की जलापूर्ति की व्यवस्था ग्रीष्म काल में भी सुचारु रूप से बनी रहे, इस दृष्टि से धरातलीय जल संरचनाओं की जानकारी लेकर, देवगढ़ और उसके आसपास 800 कुएं एवं 900 बावड़ियों का निर्माण करवाया था।

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देवगढ़ के तत्कालीन राजाओं ने इतनी शिद्दत से जो जलसंरचनाएं बनाई थी, निश्चय ही उनके जल के प्रति आकर्षण, समर्पण तथा महत्व को रेखांकित करती हैं।

विश्व के किसी भी राज्य में प्रजा हितैषी जलापूर्ति व्यवस्था के लिए इतनी बड़ी संख्या में बावड़ियों का निर्माण, वह भी एक सीमित क्षेत्र में करवाना, एक विश्व कीर्तिमान स्थापित करता है, जो हमें इतिहास में विश्व के किसी भी क्षेत्र में दृष्टिगत नहीं होता है। 

इस प्रकार देवगढ़ के गोंड राजवंश ने अपने इस अद्भुत अविश्वसनीय बावड़ियों के माध्यम से विश्व पटल पर अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करवा दिया। 21वीं शताब्दी में जलसंरक्षण का यह विश्व में एक अद्वितीय उदाहरण होगा।

देवगढ़ की इन प्राचीन बावड़ियों की पहचान एवं खोजने का कार्य जिला प्रशासन ने नवंबर 2019 में प्रारंभ किया। जिसमें जिले में देवगढ़ गांव के आसपास के क्षेत्र में 42, विजयगढ़ में 5, कलकोट गांव में 15 और तात्कालिक समय की जिले के अन्य क्षेत्रों में भी बाबड़िया मिली है। 

इस प्रकार लगभग 65 बावड़िया और 14 कुंए खोजे गए। इनका मरम्मत आदि जीर्णोद्धार का कार्य, मनरेगा योजना से वर्ष 2020 में किया गया। 

मरम्मत - जीर्णोद्धार कार्य इस तरह किया गया कि बावड़ियों के मूल स्वरूप और संरचना में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन ना हो। 

यहाँ सभी बावड़िया और कुएं जमीन में दबे हुए थे, जिनका आंशिक सतही किनारा ही दृष्टिगत होता था। इन 65 बावड़ियों के अलावा, चरवाहों से प्राप्त सतही जानकारी के अनुसार यहाँ जंगल में लगभग 100 से अधिक बावड़ियां आसपास क्षेत्र में और हैं। प्रशासन द्वारा खोजी गई ऊपर वर्णित बावड़ियां सिर्फ किसानों के खेत की हैं।

देवगढ़ के कुएं - जनश्रुति अनुसार देवगढ़ के 800 कुएं मेंं से अभी तक 14 कुुंए ही चिन्हित किए गए हैं। कुएं कम संख्या में मिलने का मुख्य कारण यह लगता है, कि कुएं का आकार बहुत छोटा होनेेे से, इनमें घास फूस, झाड़, पत्थर व मिट्टी से भर जाने केेे कारण इनकी जानकारी कम प्राप्त हुई है। यहांं दो प्रकार केे कुएं दृष्टिगोचर हुए है। जो लगभग 400 से 450 वर्ष प्राचीन हैं।

(1.) गोल कुएं - गोल आकार के कुएं का व्यास लगभग 3.5 फीट है। कुएं की गहराई लगभग 40 से 50 फीट है। कुएं के अंदर का प्लास्टर आज भी अच्छी हालत में है। इन कुओं में जल स्तर ग्रीष्म काल में भी बना रहता है।

(2.) चौकोर कुएं - इन कुओं का आकार आयताकार है एवं कुएं की गहराई लगभग 40 से 50 फीट है। इनका आकार 3 फीट बाई 4 फीट है। कुए के अंदर का प्लास्टर आज भी अच्छी हालत में है। इन कुओं में जल स्तर ग्रीष्म काल में भी बना रहता है।

[भाग-2 में देखें अलग-अलग प्रकार की बावड़ियां - छिंदवाड़ा का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल]

देवगढ़ की चोर बावड़ी/बावली विडियो देखें :-


Direction To Devgarh Bavadi | Stepwells of Devgarh, Chhindwara, Madhya Pradesh (देवगढ़ की बावड़ियां, जिला छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश {भाग-1}) :-


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